पटना की बाढ़ में BJP-JDU गठबंधन भी डूब गईल

nitish kumar

एकदम सही हैडिंग है. बीजेपी और जदयू के बीच तल्खी चरम पर है और ऐसा लग रहा है कि अगला चुनाव त्रिकोणीय हो सकता है. राजद ने पहले ही नीतीश कुमार की एंट्री को टाटा बाए-बाए कह दिया है. बीजेपी अगर जदयू से अलग हो जाती है तो जदयू के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है.

बीजेपी ने कल के रावण वध कार्यक्रम से खुद को किनारा कर लिया. सुशील मोदी जो नीतीश के पक्के भक्त माने जाते थे वह भी नहीं आये. जाहिर है सीएम नीतीश कुमार के साथ बीजेपी नेताओं के मंच पर मौजूद नहीं रहने के कारण बिहार एनडीए में दरार पड़ने की अटकलें फिर से लगाई जाने लगी हैं.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष मदन मोहन झा शामिल हुए, सबसे खास ये रहा कि मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बगल में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बैठे.

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कई मुद्दे कारण बढ़ी तल्खी

पहला और सबसे बड़ा मुद्दा बना बाढ़. बीजेपी ने खुलकर बाढ़ के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया. गिरिराज सिंह हो या बिहार बीजेपी अध्यक्ष सबने एक सुर में पटना में बाढ़ को नीतीश और उनके अधिकारीयों को जिम्मेदार ठहराया.

श्याम रजक का सुशील मोदी पर हमला

श्याम रजक ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि सुशील मोदी को सिर्फ राजेन्द्र नगर ही नजर आता है और उन्हें बयान देने के अलावा कोई काम नहीं. वहीं उन्होंने पटना जिला के प्रभारी मंत्री नंद किशोर यादव पर कहा कि उन्हें पटना सिटी को छोड़कर किसी और क्षेत्र की चिंता नहीं है. पुनपुन और बाकी इलाकों से किसी को कोई मतलब नहीं.

RSS की जासूसी

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण के समय बिहार में आरएसएस सहित 19 हिंदूवादी संगठनों और उनके सदस्यों की जासूसी करने के लिए 28 मई को जारी बिहार विशेष शाखा की चिट्ठी पर सियासी घमासान मचा. राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि यह सीएम नीतीश के आदेश से जारी किया गया था, क्योंकि गृह विभाग उनके जिम्मे है.

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